The lost trip: Nostalgia 2
a wondering view extracted from this trip☺ ...... शाम को स्कूल आते ही हमारे गांव के एक्सपेरिएंस शेयर करने के लिए एक सेशन रखा गया। हम सब पूरा दिन वैसे भी काफी थक गए थे पर अब कुछ कर नहीं सकते थे। कुछ आधे या एक घंटे बाद सेशन शुरू हुआ। सबने अपने -अपने एक्सपेरिएंस बताये ,सुन कर काफी अच्छा लग रहा था क्योकि सब अलग अलग जगह गए थे तो किसी ने हल चलाया ,कोई पानी से भीग के आया तो कोई रास्तो पर गिर गिर कर आया। मेरा भी बोलने का काफी मन था ,मैं क्या सारे कुछ न कुछ बोलना चाह रहे थे पर काफी टाइम होता जा रहा था तो मैंने सोचा छोड़ो ,क्योकि भूख बड़ी तेज़ लगी थी। चलो फिर खाना वाना भी हो गया उस रात सुब काफी थके थे तो जल्दी ही सो गए। Next day... सुबह योग से दिन शुरू हुआ। आज मैं तो कुछ जल्दी ही मैदान में पहुंच गया था क्योकि आखिरी रात को हमने तय किया था कि हमारा ग्रुप सबसे पहले मैदान में पहुंच कर अपना स्लोगन बोल देगा जिससे हमे एक्स्ट्रा पॉइंट मिल जाएँ।,पर मेरे आलावा कोई वहां जल्दी पंहुचा ही नहीं। ऎसे ही फिर कुछ सेशन्स चले और शाम को खेल वागैरा भी च...